IRDAI क्या है और यह कैसे काम करता है | जीवन बीमा लेने से पहले इसे जानना है जरुरी

Kishan Jha
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 दोस्तों आप जब भी किसी भी कंपनी में जीवन बीमा लेने के लिए उस कंपनी से जुड़ते है तो आप यह जांच पड़ताल नहीं करते है कि हम जीवन बीमा तो ले रहे है। परन्तु यह कंपनी जो मुझे जीवन बीमा दे रही है यह खुद बीमा करने का लाइसेंस प्राप्त की हुई है या नहीं। कई बार ऐसा होता है कि आप उस फ्रॉड जीवन बीमा कंपनी के शिकार बन जाते है जिनको खुद जीवन बीमा करने का लाइसेंस प्राप्त नहीं है। अब आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि एक जीवन बीमा कंपनी को लोगों को जीवन बीमा देने के लिए किस तरह का लाइसेंस की जरूरत होती है। 



आप यह भी सच सोच रहे होंगे कि एक जीवन बीमा कंपनी चलाने के लिए कौन-कौन से लाइसेंस की जरूरत होती है और कहां-कहां उसका रजिस्ट्रेशन करना होता है। दोस्तों हम आपके इन सवालों का जवाब जरूर देंगे। हम आपको बताएंगे कि एक सही जीवन बीमा कंपनी को कैसे भारत सरकार से मान्यता कैसे प्राप्त होता है और भारत सरकार के किस विभाग में उसको अपना एसेट और लायबिलिटी दिखानी होती है और लाइसेंस प्राप्त करना होता है। 


बीमा कंपनी को लाइसेंस कौन देता है


दोस्तों एक जीवन बीमा कंपनी बनाने के लिए भारत सरकार के IRDAI विभाग के द्वारा लाइसेंस बनवाना होता है। जब तक आपको लाइसेंस की प्राप्ति नहीं होती है आप किसी ग्राहकों का जीवन बीमा नहीं कर सकते है। दोस्तों एक जीवन बीमा कंपनी बनाने या शुरू करने के लिए IRDAI विभाग से लाइसेंस लेना पड़ता है। दोस्तों आज हम मुख्य बातें करने वाले है IRDA के बारे में। हम आपको बताएंगे कि IRDA एक जीवन बीमा कंपनी को किस आधार पर लोगों को जीवन बीमा करने का आदेश देता है। IRDA कैसे कैसे एक जीवन बीमा कंपनी को लाइसेंस प्रदान करता है। 


लाइसेंस देने की प्रक्रिया


इंश्योरेंस एक्ट 1938 और 1999 के तहत IRDAI सभी इंश्योरेंस कंपनियों को लाइसेंस प्रदान करता है। इंश्योरेंस कंपनी का लाइसेंस प्रदान करने के लिए कुछ मुख्य शर्ते होती है ऐसी पूरी करनी होती है।


Capital 


IRDAI ये देखती है कि नियम और शर्तों के अनुसार इंश्योरेंस कंपनी जो शुरू की जा रही है तो उसकी पूंजी कितनी है। क्या  नियम और शर्तों के अनुसार पूंजी है या है। नियम और शर्तों के अनुसार पूंजी होनी अनिवार्य है।


विदेशी कंपनी


अगर कोई विदेशी कंपनी से हिस्सेदारी की जाती है तो हिस्सेदारी में 74% तक विदेशी कंपनी हिस्सेदारी अपना रख सकता है। 


लाइसेंस रिन्यूअल 


इंश्योरेंस कंपनी को अपने लाइसेंस को बरकरार रखने के लिए कुछ नियम भी रखे गए है। पहले इंश्योरेंस कंपनी को अपने लाइसेंस बरकरार रखने के लिए हर साल रिन्यू करना पड़ता था। लेकिन नए नियमों के अनुसार अब IRDAI ने INSURANCE COMPANY के लाइसेंस जारी रखने के लिए वार्षिक फीस लागू कर दी है। हर इंश्योरेंस कंपनी को साल के 31 दिसंबर को वार्षिक फीस प्रदान करना होगा। तब उनका लाइसेंस बरकरार रहेगा।


IRDAI को समझना जरूरी क्यों?


आपको यह जानना चाहिए की IRDAI क्या है और IRDAI किसी भी जीवन बीमा कंपनी को लाइसेंस देने से पहले किन-किन बातों का उसे ध्यान रखना को बोलता है। एक जीवन बीमा कंपनी कैसे IRDA के आदेशों का पालन करता है। IRDA के कहीं ऐसे मुख बिंदु और नियम शर्ते होते है। जिसे पूरा करने के बाद ही किसी जीवन का कंपनी को लाइसेंस प्रदान किया जाता है। हम आपको निचे यह भी बताते है की किसी जीवन बीमा कंपनी को IRDAI विभाग से एक जीवन बीमा कंपनी के रजिस्ट्रेशन करने और लाइसेंस लेने के बाद IRDAI के किन किन बातें और नियमों को पालन कारण पड़ता है। 


आपको यह भी जानना चाहिए कि यदि कोई जीवन बीमा कंपनी IRDAI के दिए हुए नियम और दिशा निर्देशों को अगर नहीं मानता है तो IRDA एक जीवन बीमा कंपनी पर कैसे कठिन एक्शन ले सकता है। अगर जीवन बीमा कंपनी अपने ग्राहकों के साथ कोई भी गलत व्यवहार करता है या जीवन बीमा का सुरक्षा और फायदा देने से मुकरता है। तब IRDAI जीवन बीमा कंपनी को क्या सजा देता है। यहां तक कि IRDAI उनका लाइसेंस भी रद्द कर सकता है और उनकी कंपनी को बंद होने की घोषणा भी कर सकता है।


इसलिए आपको इसके बारे में पूरी जानकारी होना चाहिए। हम आपको नीचे आपको सारी जानकारी विस्तार से बताने वाले है। बस हमारे साथ बने रहिए और इस आर्टिकल को पूरा पढ़िए और समझिए।


IRDAI क्या है?


यह भारत सरकार के जीवन बीमा उद्योग का विकास और व्यवस्था बनाए रखने वाली एक विभाग है। IRDAI का पूरा नाम भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (Insurance Regulatory and Development Authority of India) है। IRDAI का मुख्यालय हैदराबाद में स्थित है। इसका स्थापना 1999 में हुआ था।


IRDA Chairman


IRDA के वर्तमान Chairman अजय सेठ है। 1999 से स्वायत्त निकाय भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम के अंतर्गत आता है। IRDA एक भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण संस्था है। IRDA भारत सरकार के जीवन बीमा अधिनियम और सूचनाओं का ध्यान रखना है। 


IRDAI का मुख्य कार्य 


IRDAI का मुख्य और सबसे महत्वपूर्ण कार्य जीवन बीमा लेने वाले पॉलिसी धारकों के हित की सुरक्षा करता है। IRDAI का कार्य है बीमा उद्योग और व्यवस्था को विकास के रास्ते पर ले जाना। बीमा कंपनी के लाइसेंस तथा मानदंड निर्धारित करता है। कोई भी बीमा कंपनी अपने ग्राहकों के साथ दुर्व्यवहार करता है या वह अपनी मनमानी करता है। तब IRDAI जीवन बीमा कंपनी को क्या सजा देता है। IRDAI का निश्चित दिशा निर्देशों का पालन नहीं करता है। तब IRDAI उस बीमा प्रदान करने वाली कंपनी पर कानूनी कार्रवाई करता है और उसका लाइसेंस भी रद्द कर देता है।  


उदाहरण के लिए जैसे भारत में सभी प्रकार की बैंकों को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के निर्धारित दिशा निर्देश के अनुसार चलता है। ठीक उसी प्रकार सभी जीवन बीमा कंपनी IRDAI के विशेष निर्देश को पालन करती है। IRDAI हर जीवन बीमा प्रदान करने वाली कंपनी पर कड़ी निगरानी रखता है। IRDAI इसी प्रणाली से कार्य करती है और पूरे बीमा बाजार को संतुलित रूप से चलती है। ताकि जीवन बीमा कंपनी और ग्राहकों के बीच तालमेल बनी रहे और सब कुछ संतुलित व्यवस्था में चलती रहे।


ग्राहकों की सुरक्षा 


IRDAI ग्राहकों की सुरक्षा ही नहीं करता है बल्कि ग्राहकों के किए गए शिकायतों को ध्यानपूर्वक समझता है। ग्राहकों के शिकायतों के आधार पर एक जीवन बीमा कंपनी को कठिन सजा दे सकता है और लाइसेंस भी रद्द करता है। IRDAI पॉलिसी धारकों को के द्वारा किए गए शिकायतों को ध्यानपूर्वक देखता समझता है। पॉलिसी धारक अगर किसी जीवन बीमा कंपनी के बारे में ज्यादा से ज्यादा शिकायत दर्ज करता है तो IRDAI को कठोर कदम उठाना पड़ता है। हम आपको नीचे इसकी मुख्य भूमिका और कार्य का विवरण प्रदान कर रहे है। इसे ध्यान से समझने की कोशिश करिए यह आपके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।


1. Free Look Period 


जब भी कोई व्यक्ति किसी इंश्योरेंस कंपनी से पॉलिसी ले तो ग्राहक इंश्योरेंस प्लान का अच्छे से तहकीकात कर सकता है। उसके लिए उनको 15 से 30 दिनों का फ्री लुक पीरियड का समय मिलता है। अगर ग्राहकों को लगता है कि इंश्योरेंस में ज्यादा बेनिफिट नहीं है या फिर यह इंश्योरेंस मेरे लिए सही नहीं है। तो पॉलिसी धारक फ्री लुक पीरियड के समय अवधि के अंदर वह पॉलिसी को कैंसिल कर सकता है l पॉलिसी धारक को पहला निवेश पूरी तरह से वापस मिल जाएगा। 


2. Grace Period 


पॉलिसी धारकों को ग्रेस पीरियड भी दिया जाता है। ग्रेस पीरियड में आपको प्रीमियम भरने के लिए अतिरिक्त समय मिलता है। कोई पॉलिसी धारक अगर समय पर अपना प्रीमियम नहीं भरता है तो उसका तुरंत से पॉलिसी खत्म नहीं होगा। प्रीमियम नहीं भरने के कई कारण हो सकते है। इसीलिए पॉलिसी धारकों को के लिए  ग्रेस पीरियड बनाया गया है।


पॉलिसी धारकों की वित्तीय संकट या दुर्भाग्य बस उनकी दुर्घटना हो गई है तो उसको ग्रेस पीरियड समय अवधि मिलता है। ग्रेस पीरियड में अगर आपकी मासिक प्रीमियम है तो आपको 15 दिन का अतिरिक्त समय मिलता है अगर आप Quarterly, छमाही, या सालाना  प्रीमियम भरते है तो आपको 30 दिन का अतिरिक्त समय मिलता है।


3. धारा 45


धारा 45 के अंतर्गत पॉलिसी धारक अगर 3 साल तक प्रीमियम भरते है तो बीमा कंपनी ग्राहकों को क्लेम देने से मना नहीं कर सकती है। पहले क्या होता था कि कई छोटे-छोटे कारणों की वजह से क्लेम रिजेक्ट कर दिया जाता था। लेकिन यह धारा 45 के अनुसार अब ग्राहकों को 3 साल तक प्रीमियम भरने के बाद कंपनी को क्लेम देना ही पड़ेगा।


4. Surrender Value


कोई पॉलिसी धारक अगर 3 साल तक प्रीमियम भर चुका है। उसके बाद उसको लगता है कि यह इंश्योरेंस मेरे लिए फायदेमंद नहीं है या फिर प्रीमियम महंगा है इंश्योरेंस में ज्यादा बेनिफिट नहीं है तो वह अपनी पॉलिसी को सरेंडर कर सकता है। ऐसी स्थिति में इंश्योरेंस कंपनी को उनका सरेंडर वैल्यू देना पड़ेगा। सरेंडर वैल्यू नियम और शर्तों के अनुसार अलग-अलग प्रतिशत (%) में हो सकता है। जितने लंबे समय के बाद पॉलिसी धारक सिलेंडर करता है उतना अधिक सरेंडर वैल्यू मिल सकता है।


5. Claims -  


ग्राहक क्लेम की प्रक्रिया को पूरा कर लेता है यानी की वो सारे दस्तावेज को जमा कर देता है। तो नियम यह है कि कंपनी सभी दस्तावेज को जांच पड़ताल करने के बाद अगर संतुष्ट है तो 30 दिनों के भीतर क्लेम की प्रक्रिया को पूरा करें। अगर 30 दिन के बाद पॉलिसी धारक को क्लेम का पैसा नहीं मिलता है। तो पॉलिसी धारक को इंश्योरेंस कंपनियां बैंक के ब्याज दर के अनुसार 2% इंटरेस्ट जुर्माना के रूप में देगा। यानी कि ग्राहक को क्लेम के पैसे के साथ-साथ 2% अधिक ब्याज दर भी मिलेगा।


IRDAI की मुख्य भूमिका और कार्य इस प्रकार है:


  • बीमा क्षेत्र का व्यवस्थित विकास सुनिश्चित करना और ग्राहकों को उचित लाभ प्राप्त करना।

  • लोगों को पॉलिसी में निवेश करने और सुरक्षा प्राप्त करने में मदद मिल सके।

  • बीमा बाजार में विकास कराना।

  • जीवन बीमा की बेहतर व्यवस्था में बनाए रखना।

  • बीमा बाजार में बिना कोई पक्षपात किया प्रथाओं और ईमानदारी के मानकों को बढ़ावा देना।

  • पारदर्शिता और व्यवस्थित आचरण को बढ़ावा देना।

  • पॉलिसी धारक के हितों को सुरक्षित करना ताकि उन्हें मौजूदा प्रणाली पर भरोसा हो।

  • दावा निपटान की प्रक्रिया में तेजी लाना और संबंधित विवादों का समय पर समाधान करना।

  • किसी भी धोखाधड़ी या घोटाले का पता लगाने के लिए मानक स्थापित करें और सतर्कता बनाए रखें।

  • पॉलिसी धारकों की शिकायत सुनना और उस पर कार्रवाई करना। 

  • जीवन बीमा कंपनी को एक दिशा निर्देश के बंधन में रखना।


IRDAI FULL EXPLAIN VIDEO -


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निष्कर्ष 


अतः हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि हमने इस Article के माध्यम से आपको बताया कि IRDAI क्या होता है और यह कैसे कार्य करता है और जीवन बीमा कंपनी और ग्राहकों के बीच संतुलन बनाए रखना है। आशा करता हूं कि आपको जानकारी सही लगी होगी और हमने आपको सही जानकारी विस्तार से बताने की कोशिश की है।


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